Sunday, January 4, 2026

जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं


जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं
अग्रज श्री नवनीत मालवीय जी 
शासकीय अधिवक्ता 
जिला न्यायालय - देवरिया 
का शुभ जन्मदिन है। 
हार्दिक शुभकामनाएं 
प्रणाम- जय श्री राम

रांची यात्रा पूर्ण

 







Saturday, January 3, 2026

संयुक्त बैठक












विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान नई दिल्ली द्वारा आयोजित अखिल भारतीय प्रचार विभाग एवं अभिलेखागार की संयुक्त बैठक. 
03-04 जनवरी, 2026 - रांची

टीवी पर लाइव

  




Friday, January 2, 2026

सुप्रभात रांची





“रांची के आकाश से बादलों का आवरण धीरे-धीरे हट गया है। सूर्य की स्वर्णिम किरणें धरती पर मुस्कान बिखेर रही हैं और शहर धूप की उजली चादर ओढ़े आलस भरी शांति में नहाया हुआ प्रतीत हो रहा है।”

तीन दिन रांची शहर में प्रवास








रांची झारखंड की राजधानी और एक ऐतिहासिक-सांस्कृतिक शहर है। इसे “झरनों का शहर” और “पहाड़ों की रानी” भी कहा जाता है। 
रांची क्षेत्र प्राचीन काल से मुंडा, उरांव और हो जैसी आदिवासी जनजातियों का निवास स्थान रहा है।
यह क्षेत्र पहले छोटानागपुर पठार का हिस्सा था और स्थानीय जनजातीय मुखियाओं द्वारा शासित होता था।
भगवान बिरसा मुंडा, महान आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी, ने रांची और आसपास के क्षेत्रों से अंग्रेजों के विरुद्ध आंदोलन चलाया।
यहाँ की जनजातीय संस्कृति, नृत्य, संगीत, पर्व-त्योहार (सरहुल, करम) रांची को विशिष्ट बनाते हैं।
बिरसा मुंडा संग्रहालय आदिवासी इतिहास और संस्कृति का प्रमुख केंद्र है।
रांची अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है—
दसाम जलप्रपात – स्वर्णरेखा नदी पर स्थित, अत्यंत आकर्षक
हुंडरू जलप्रपात – झारखंड का सबसे ऊँचा जलप्रपात
जोन्हा जलप्रपात – सीढ़ीनुमा संरचना के लिए प्रसिद्ध
रॉक गार्डन और बिरसा जूलॉजिकल पार्क – पर्यटकों के लिए प्रमुख स्थल
हरियाली, पहाड़, जंगल और सुहावना मौसम रांची को एक प्राकृतिक पर्यटन स्थल बनाते हैं।
रांची न केवल ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध है, बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य और आधुनिक विकास का भी सुंदर संगम है। यही कारण है कि रांची झारखंड का हृदय और पहचान मानी जाती है।

Thursday, January 1, 2026

देव दर्शन





देव दर्शन 1 जनवरी 2026
बासुकीनाथ (बासुकीनाथ धाम) झारखंड राज्य के दुमका ज़िले में स्थित भगवान शिव का एक प्रमुख तीर्थ है। इसे बाबा बैद्यनाथ धाम (देवघर) का “सहचर/उप-पीठ” भी माना जाता है। 
1. बासुकीनाथ का महत्व
भगवान शिव का पवित्र धाम: यहाँ बाबा बासुकीनाथ (शिव) की पूजा होती है।
बैद्यनाथ धाम से संबंध: मान्यता है कि देवघर में जल अर्पण के बाद बासुकीनाथ में दर्शन किए बिना यात्रा पूर्ण नहीं मानी जाती।
श्रावणी मेला: सावन महीने में लाखों श्रद्धालु यहाँ आते हैं। कांवरिये देवघर से जल चढ़ाने के बाद बासुकीनाथ पहुँचते हैं।
मनोकामना पूर्ति: भक्तों का विश्वास है कि सच्चे मन से पूजा करने पर बाबा इच्छाएँ पूर्ण करते हैं।
2. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
बासुकीनाथ धाम प्राचीन काल से आस्था का केंद्र रहा है।
स्थानीय परंपराओं और पुराण-कथाओं के अनुसार यह स्थल नागों के राजा वासुकी से जुड़ा हुआ है।
समय के साथ यहाँ मंदिर का निर्माण और विस्तार हुआ; वर्तमान मंदिर लोक-आस्था और क्षेत्रीय राजाओं/भक्तों के सहयोग से विकसित हुआ।
यह क्षेत्र आदिवासी संस्कृति और शैव परंपरा का संगम माना जाता है।
3. बासुकीनाथ की कथा (पौराणिक मान्यता)
वासुकी नाग की कथा: वासुकी नाग, नागों के राजा, भगवान शिव के परम भक्त थे। कहा जाता है कि उन्होंने यहाँ घोर तपस्या की।
उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए और उन्हें वरदान दिया। उसी स्थान पर शिव बाबा बासुकीनाथ के रूप में प्रतिष्ठित हुए।
एक अन्य मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन में प्रयुक्त वासुकी नाग से भी इस धाम का नाम जुड़ा है, जो शिव से अभिन्न संबंध दर्शाता है।
4. पूजा-पद्धति और परंपराएँ
जलाभिषेक, बेलपत्र, धतूरा, भांग अर्पण किया जाता है।
सावन, महाशिवरात्रि और सोमवारी व्रत के दिनों में विशेष भीड़ रहती है।
देवघर–बासुकीनाथ यात्रा को पूर्ण शैव यात्रा माना जाता है।

जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं

जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं अग्रज श्री नवनीत मालवीय जी  शासकीय अधिवक्ता  जिला न्यायालय - देवरिया  का शुभ जन्मदिन है।  हार्दिक शुभकामनाएं  ...