Sourabh Malviya डॉ.सौरभ मालवीय
विचारों की धरा पर शब्दों की अभिव्यक्ति...
Monday, May 4, 2026
Sunday, May 3, 2026
विद्या भारती की बालिका शिक्षा समीक्षा बैठक सम्पन्न
लखनऊ। विद्या भारती, पूर्वी उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित बालिका शिक्षा की समीक्षा बैठक निराला नगर, लखनऊ में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई। बैठक में क्षेत्र के विभिन्न आयामों पर विस्तृत चर्चा करते हुए बालिका शिक्षा के विस्तार, गुणवत्ता और प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा हुई।
समापन सत्र को संबोधित करते हुए क्षेत्रीय मंत्री डॉ. सौरभ मालवीय ने कहा कि “सर्व समाज के लिए शिक्षा सुनिश्चित करना तथा नारी शक्ति के जागरण हेतु बालिका शिक्षा को केन्द्र में रखना हमारा प्रमुख उद्देश्य है।” उन्होंने कहा कि बालिका शिक्षा केवल सामाजिक परिवर्तन का माध्यम नहीं, बल्कि सशक्त और आत्मनिर्भर राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है।
बैठक में बालिकाओं के सर्वांगीण विकास, संस्कारयुक्त शिक्षा, तथा समाज में उनके नेतृत्वकारी योगदान को बढ़ाने के विभिन्न आयामों पर विचार-विमर्श किया गया। साथ ही, विद्यालय स्तर पर चल रही योजनाओं की समीक्षा कर उन्हें और प्रभावी बनाने हेतु आवश्यक सुझाव भी प्रस्तुत किए गए।
इस अवसर पर रेखा चूड़ासमा एवं उमाशंकर मिश्र जी विशेष रूप से उपस्थित रहे और अपने विचारों से बैठक को समृद्ध किया।
Friday, May 1, 2026
भारत केंद्रित शिक्षा से ही बनेगा दिव्य और भव्य भारत: डॉ. सौरभ मालवीय
फर्रुखाबाद। सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, श्याम नगर फर्रुखाबाद में विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के तत्वावधान में आयोजित ‘प्रधानाचार्य कार्य योजना बैठक’ के समापन सत्र में क्षेत्रीय मंत्री डॉ. सौरभ मालवीय ने स्वदेश केंद्रित शिक्षा की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षा पूरी तरह से स्वदेशी मूल्यों पर आधारित होनी चाहिए, तभी हम एक दिव्य और भव्य भारत का निर्माण कर सकते हैं।
डॉ. मालवीय ने अपने संबोधन में कहा कि समाज की अपेक्षाओं पर खरा उतरना ही शिक्षण संस्थानों का प्रमुख उद्देश्य होना चाहिए, क्योंकि विद्या भारती का वास्तविक आधार समाज ही है। उन्होंने विद्या भारती की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्तमान में देशभर में संस्था के लगभग 25 हजार विद्यालय संचालित हो रहे हैं, जिनमें 1.5 लाख से अधिक आचार्य एवं लाखों छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। साथ ही, संस्था के पूर्व छात्र विश्व के 85 देशों में विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं, जो इसकी वैश्विक पहचान को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि हजारों वर्षों की परतंत्रता के बावजूद भारत की आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक चेतना अक्षुण्ण बनी हुई है। अनेक आक्रांताओं के प्रयासों के बावजूद भारतीय विचारधारा आज भी सशक्त है, जिसका मूल आधार हमारे शास्त्र हैं। उन्होंने सभी शिक्षकों और शिक्षण संस्थानों से आह्वान किया कि वे एक सक्षम, समर्थ और सशक्त भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।
उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रधानाचार्य सम्मानित
इस अवसर पर विभिन्न विद्यालयों के उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रधानाचार्यों को अंगवस्त्र एवं उपहार देकर सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में श्री राघवेन्द्र पाण्डेय, प्रियंका सिंह, श्री गजेन्द्र सिंह, श्री सोमेश जी, श्री विक्रम बहादुर सिंह, श्री अनिल कुमार मिश्र एवं श्री नवीन कुमार अवस्थी प्रमुख रहे।
प्रधानाचार्य ही विद्यालय की पहचान
डॉ. मालवीय ने कहा कि एक प्रधानाचार्य ही विद्यालय की पहचान, गरिमा और प्रतिष्ठा का केंद्र होता है। उन्हें अपने दायित्वों का निर्वहन पूर्ण निष्ठा, समर्पण और विश्वास के साथ करना चाहिए।
कार्यक्रम का सफल संचालन श्री रत्नेश अवस्थी (प्रधानाचार्य, सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, दामोदर नगर) द्वारा किया गया। अंत में संभाग निरीक्षक श्री शिव करन जी ने सभी अतिथियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
-रामानुज अग्निहोत्री
मीडिया प्रभारी
मीडिया प्रभारी
Thursday, April 30, 2026
जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें
विद्यार्थी परिषद के पूर्व संगठन मंत्री, भारतीय जनता पार्टी की पत्रिका कमल ज्योति के संपादक श्री राजकुमार जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
आपके उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु जीवन की कामना करता हूं !
टीवी पर लाइव
महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण के प्रति भाजपा की प्रतिबद्धता!
देश की महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण के प्रति प्रतिबद्धता अटूट और निरंतर है। जहां एक ओर विपक्ष का महिला विरोधी आचरण बार-बार सार्वजनिक जीवन में उजागर हुआ है, वहीं भाजपा ने हमेशा महिलाओं को सम्मान और अवसर देने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं।
नारी शक्ति राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। केंद्र और राज्य सरकारों ने महिलाओं की सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए अनेक योजनाएं और नीतियां लागू की हैं। नारी शक्ति वंदन अधिनियम जैसे ऐतिहासिक निर्णय इस दिशा में मील का पत्थर हैं, जो महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को सुनिश्चित करते हैं।
इसके विपरीत, विपक्ष के कई नेताओं के बयान और व्यवहार महिलाओं के प्रति उनकी असंवेदनशीलता को दर्शाते हैं, जो न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है बल्कि समाज के लिए भी गलत संदेश देता है।
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