Sourabh Malviya डॉ.सौरभ मालवीय
विचारों की धरा पर शब्दों की अभिव्यक्ति...
Tuesday, February 17, 2026
जन गोष्ठी
संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ लखनऊ महानगर द्वारा परम पूज्य सर संघचालक मोहन भागवत जी के सान्निध्य में आयोजित प्रमुख जन गोष्ठी में प्रतिभाग किया।
श्रेष्ठ भारत : आत्मबोध से राष्ट्र बोध
श्रेष्ठ भारत का निर्माण केवल आर्थिक समृद्धि या तकनीकी प्रगति से नहीं होता, बल्कि वह आत्मबोध से उत्पन्न राष्ट्रबोध की चेतना से होता है। जब व्यक्ति स्वयं को पहचानता है, अपने मूल्यों, संस्कृति और कर्तव्यों को समझता है, तभी वह राष्ट्र के प्रति सजग और उत्तरदायी बनता है।
अपने अस्तित्व, अपनी परम्परा, अपनी शक्ति और अपनी जिम्मेदारियों को जानना। भारतीय ज्ञान परम्परा में “आत्मानं विद्धि” का संदेश यही देता है कि व्यक्ति पहले स्वयं को पहचाने। जब व्यक्ति अपने भीतर की क्षमता, नैतिकता और कर्तव्यबोध को जाग्रत करता है, तब वह केवल निजी हित तक सीमित नहीं रहता।
राष्ट्र के गौरव, उसकी एकता, अखंडता और संस्कृति के प्रति सजग होना। यदि व्यक्ति में आत्मबोध है तो वह समझता है कि उसका व्यक्तिगत आचरण ही राष्ट्र की छवि बनाता है।
ईमानदारी से कार्य करना राष्ट्र निर्माण है।
सामाजिक समरसता को बढ़ाना राष्ट्र सेवा है।
पर्यावरण संरक्षण करना भविष्य की पीढ़ियों के प्रति कर्तव्य है।
भारत में राष्ट्र केवल भौगोलिक सीमा नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना है। वेदों से लेकर उपनिषदों तक और आधुनिक युग में भी “वसुधैव कुटुम्बकम्” का विचार हमें व्यापक राष्ट्रचेतना देता है।
भगवद्गीता में श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया कर्तव्य और धर्म का उपदेश भी यही सिखाता है कि व्यक्तिगत मोह से ऊपर उठकर व्यापक हित के लिए कर्म करना ही श्रेष्ठ मार्ग है।
आज जब भारत विश्व मंच पर उभरती शक्ति के रूप में स्थापित हो रहा है, तब आवश्यक है कि प्रत्येक नागरिक अपने भीतर आत्मगौरव और अनुशासन का विकास करे। शिक्षा, शोध, संस्कृति, सेवा और नवाचार—हर क्षेत्र में आत्मबोध आधारित दृष्टि राष्ट्र को श्रेष्ठता की ओर ले जाएगी।
श्रेष्ठ भारत का सपना किसी एक व्यक्ति या सरकार से पूरा नहीं होगा। यह तब साकार होगा जब हर नागरिक अपने भीतर राष्ट्र की अनुभूति करे।
आत्मबोध से उत्पन्न राष्ट्रबोध ही भारत को न केवल शक्तिशाली, बल्कि नैतिक और सांस्कृतिक रूप से भी विश्व में आदर्श बनाएगा।
जब व्यक्ति जागेगा, तभी राष्ट्र जागेगा; और जब राष्ट्र जागेगा, तभी श्रेष्ठ भारत का उदय होगा।
Sunday, February 15, 2026
Friday, February 13, 2026
आत्मीय भेंट
बैठक में सामाजिक समरसता, शिक्षा, स्वास्थ्य, जनकल्याण एवं लोकमंगल से जुड़े विभिन्न आयामों पर विचार-विमर्श किया गया। संत स्वरूप आशीष गौतम जी ने दिव्य सेवा प्रेम मिशन द्वारा संचालित सेवा परियोजनाओं की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए समाज के अंतिम व्यक्ति तक सेवा पहुँचाने के संकल्प को दोहराया। उन्होंने आगामी आयोजनों एवं जनजागरण अभियानों की जानकारी भी साझा की।
विधायक पी एन पाठक जी ने संस्थान के सेवा कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि समाज के उत्थान के लिए ऐसे संगठनों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस अवसर पर शहर के अनेक प्रमुख नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे। सभी ने दिव्य सेवा संस्थान के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए आगामी कार्यक्रमों की सफलता के लिए शुभकामनाएँ प्रेषित कीं।
Tuesday, February 10, 2026
भारतीय ज्ञान परम्परा विषय पर व्याख्यान
वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा आयोजित शोध कार्यशाला में “भारतीय ज्ञान परम्परा” विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों से आए शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की हैं l
इस अवसर पर डॉ. सौरभ मालवीय ने भारतीय ज्ञान परम्परा की ऐतिहासिक, दार्शनिक एवं सांस्कृतिक आधारभूमि पर विस्तार से प्रकाश डाला। भारतीय ज्ञान परम्परा केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत है। वेद, उपनिषद, पुराण, लोकपरम्पराएँ, आयुर्वेद, योग, ज्योतिष, साहित्य और दर्शन—इन सभी ने विश्व को मानवीय मूल्यों, समरसता और वैज्ञानिक दृष्टि का संदेश दिया है।
डॉ. मालवीय ने पत्रकारिता के विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे भारतीय ज्ञान परम्परा के मूल्यों को समझते हुए समकालीन मीडिया विमर्श में सकारात्मक और तथ्यपरक दृष्टिकोण अपनाएँ। वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारतीय चिंतन की प्रासंगिकता आज और अधिक बढ़ गई है।
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