हम असहिष्णु लोग


















नई दिल्ली में चल रहे अन्तर्राष्ट्रीय पुस्तक मेले के दौरान राष्ट्रीय साहित्य संगम हॉल नम्बर 8 में “साहित्य , इतिहास में मिथक और यथार्थ” जैसे ज्वलन्त विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया. आयोजन दीनदयाल शोध संस्थान एवं राष्ट्रीय पुस्तक न्यास द्वारा संयुक्त रूप से किया गया. इस मौके पर प्रसिद्ध इतिहासकार प्रो.कपिल कुमार, इतिहासकार डॉ.रजनीश कुमार, प्रो.माखनलाल लाल उपस्थित रहे।
प्रो.कपिल कुमार ने कहा कि भारत के गौरवशाली इतिहास को तोड़मरोड़ कर पेश किया जाता रहा है. यही काम फिल्म पद्मावती में किया गया है. उन्होंने कहा कि मैंने फिल्म देखी है और फिल्म में जिस तरह दिखाया गया है. उसे देखने के बाद लगता है कि आम भारतीय समाज को ठीक तरह से पेश नहीं किया गया है. इसमें देश के लोगों को लड़ाने की बात की गई है. उन्होंने जोर देते हुए कहा कि फिल्म को देखने के बाद ही मैंने दृश्यों पर विरोध भी जताया है।
कार्यक्रम के दौरान लोकेन्द्र सिंह द्वारा लिखी पुस्तक “हम असहिष्णु लोग” का भी विमोचन किया गया. इसके अलावा आदि पत्रकार नारद जी पर आधारित पुस्तक का विमोचन किया गया, जिसके लेखक डॉ. ओमप्रकाश हैं.
इस कार्यक्रम के संयोजक और संचालन डॉ. सौरभ मालवीय ने किया।
फोटो- Surbhi Sharma & शिव नारायण

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