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Showing posts from April, 2017

लाइव लोकसभा टीवी

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा रेडियो कार्यक्रम "मन की बात " की समीक्षा आज 30 अप्रैल रविवार लोकसभा टीवी पर सुबह 10.50 बजे प्रसारित हुई.










राष्ट्र सर्वोपरि

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डॉ. सौरभ मालवीय
भारत यह एक ऐसा अद्भुत शब्द है जिसका उच्चारण ही मन को झंकृत कर देता है। जिस शब्द की कल्पना से ही संगीत निकलने लगे वह भारत है। ‘भारत’ में ‘भा’ का अर्थ होता है उजाला, सत्य, प्रकाश, आभा, ज्ञान, मोक्ष, परिपूर्ण, पोषण, जीवन आनन्द आदि आदि...। कहां तक कहें यहां तो सहस्र नाम की परम्परा ही है। विष्णु सहस्र नाम, शिव सहस्र नाम श्रीराम सहस्र नाम, गोपाल सहस्र नाम...। तो भारत के अनन्त नाम हैं अनन्त अर्थ हैं और यह संस्कृत का शब्द है संस्कृत इतनी तरल भाषा ;सपुनपपिकि संदहनंहद्ध है कि इसके अर्थ की अनन्तता सहज ही हो जाती है। भारत में ‘रत’ का अर्थ है लीन तल्लीन, लवलीन विलीन आदि। भारत का अर्थ हुआ ज्ञान में तल्लीन, भरणपोषण करने वाला, परम प्रकाशक अतएव इस धरा पर जहां भी ज्ञान की सत्य की साधना हो वह भारत भूमि है। प्रख्यात दार्शनिक ओशो की रचना ‘भारत एक सनातन यात्रा’ की प्रस्तावना में विख्यात साहित्यकर्तृ श्रीमती अमृता प्रीतम कहती हैं- ‘‘भारत एक भाव दशा है और इस जगत में जहां भी ज्ञान के अनन्त ऊंचाइयों को छूने का परम्परागत प्रयास चलता है वह भारत है।’’ इन विशिष्टताओं के बिना भारत अधूरा है। भारतीय स…

मुद्दा : कश्मार

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राष्ट्रधर्म

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राष्ट्रधर्म तो कल्पवृक्ष है,संघ-शक्ति ध्रुवतारा है।
बने जगद्गुरु भारत फिर से ,यह संकल्प हमारा है।।
अटल जी कहते है कि छात्र जीवन से ही मेरी इच्छा सम्पादक बनने की थी लिखने पढ़ने का शौक और छपा हुआ नाम देखने का मोह भी। इसलिए जब एम् ए की पढ़ाई पूरी की और कानून की पढ़ाई अधूरी छोड़ने के बाद सरकारी नौकरी न करने का पक्का इरादा बना लिया और साथ ही अपना पूरा समय समाज की सेवा में लगाने का मन भी,उस समय पूज्य भाऊ राव देवरस जी के इस प्रस्ताव को तुरंत स्वीकार कर लिया कि संघ द्वारा प्रकाशित होनेवाले राष्ट्रधर्म के संपादन में कार्य करूँगा श्री राजीवलोचन जी भी साथ होंगे।
अगस्त 1947 में पहला अंक निकला और उस समय के प्रमुख साहित्यकार सर सीताराम,डॉ भगवान दास,अमृतलाल नागर,श्री नारायण चतुर्वेदी,आचार्य वृहस्पति व् प्रोफ धर्मवीर को जोड़ कर धूम मचा दी।
(डीएवीपी के अधिकारियों को सोचना चाहिए नोटिस जारी करते समय की राष्ट्रधर्म पत्रिका अर्थात क्या ??)

91.2 FM

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नमस्कार
91.2 FM
आज दिन में 1 बजे से 2 बजे मुझे सुन सकते है
विषय-सांस्कृतिक राष्ट्रवाद

टीवी पर लाइव

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सामाजिक विकास, बंधुत्व एवं राष्ट्रीय स्मिता के अनुरूप सरकार की कार्यनीति होनी चाहिए.

टीवी पर लाइव

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गाय की रक्षा पर बहस क्यों ?

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डॊ. सौरभ मालवीय
वैदिक काल से ही भारतीय संस्कृति में गाय का विशेष महत्व है. दुख की बात है कि भारतीय संस्कृति में जिस गाय को पूजनीय कहा गया है, आज उसी गाय को भूखा-प्यासा सड़कों पर भटकने के लिए छोड़ दिया गया है. लोग अपने घरों में कुत्ते तो पाल लेते हैं, लेकिन उनके पास गाय के नाम की एक रोटी तक नहीं है. छोटे गांव-कस्बों की बात तो दूर देश की राजधानी दिल्ली में गाय को कूड़ा-कर्कट खाते हुए देखा जा सकता है. प्लास्टिक और पॊलिथीन खा लेने के कारण उनकी मृत्यु तक हो जाती है. भारतीय राजनीति में जाति, पंथ और धर्म से ऊपर होकर लोकतंत्र और पर्यावरण की भी चिंता होनी चाहिए. गाय की रक्षा, सुरक्षा बहस का मुद्दा आख़िर क्यों बनाया जा रहा है?

धार्मिक ग्रंथों में गाय को पूजनीय माना गया है. श्रीकृष्ण को गाय से विशेष लगाव था. उनकी प्रतिमाओं के साथ गाय देखी जा सकती है.
बिप्र धेनु सूर संत हित, लिन्ह मनुज अवतार।
निज इच्छा निर्मित तनु माया गुन गोपार॥
अर्थात ब्राह्मण (प्रबुद्ध जन) धेनु (गाय) सूर (देवता) संत (सभ्य लोग) इनके लिए ही परमात्मा अवतरित होते हैं. परमात्मा स्वयं के इच्छा से निर्मित होते हैं और मायातीत, गुणातीत एवम…