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Showing posts from October, 2016

अंधेरे पर प्रकाश की जीत का पर्व है दीपावली

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डॊ. सौरभ मालवीय
असतो मा सद्गमय।
तमसो मा ज्योतिर्गमय।
मृत्योर्मा अमृतं गमय।
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
अर्थात्
असत्य से सत्य की ओर।
अंधकार से प्रकाश की ओर।
मृत्यु से अमरता की ओर।
ॐ शांति शांति शांति।।
अर्थात् इस प्रार्थना में अंधकार से प्रकाश की ओर जाने की कामना की गई है. दीपों का पावन पर्व दीपावली भी यही संदेश देता है. यह अंधकार पर प्रकाश की जीत का पर्व है. दीपावली का अर्थ है दीपों की श्रृंखला. दीपावली शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के दो शब्दों 'दीप' एवं 'आवली' अर्थात 'श्रृंखला' के मिश्रण से हुई है. दीपावली का पर्व कार्तिक अमावस्या को मनाया जाता है. वास्तव में दीपावली एक दिवसीय पर्व नहीं है, अपितु यह कई त्यौहारों का समूह है, जिनमें धन त्रयोदशी अर्थात धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भैया दूज सम्मिलित हैं. दीपावली महोत्सव कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी से शुक्ल पक्ष की दूज तक हर्षोल्लास से मनाया जाता है. धनतेरस के दिन बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है. तुलसी या घर के द्वार पर दीप जलाया जाता है. नरक चतुर्दशी के दिन यम की पूजा के लिए दीप जलाए जाते हैं.  गोवर्धन पूजा…

मुलाक़ात

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सहज, सरल, आत्मिक और कलमकार रत्नेश्वर जी एक चर्चित कथाकार हैं. पटना प्रवास में मिलने की इच्छा व्यक्त की. फिर क्या था इन्होंने मुझे घर आमंत्रित किया और मेरे आने की प्रतीक्षा करने लगे. प्रवेश द्वार पर रस्सी से बंधी एक घण्टी और अंदर पहुंचते ही विशाल पुस्तकालय ज्ञान यज्ञ जैसा घर का वातावरण. तमाम चर्चाओं के साथ कब दो घंटा बीत गया पता ही नहीं चला. एक दिन पहले ही 50 साल पूरे किए थे. मेरे हिस्से का केक, मिठाई थी ही. जम कर खाने का सुख, मुझे लगा कि एक लेखक का समय कीमती होता है, इसलिए नमस्कार नमस्कार के साथ पटना से प्रस्थान.

संवाद

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बिहार बीजेपी के संगठन मंत्री आदरणीय नागेंद्र जी का सानिध्य और संवाद का अवसर आज पटना में मिला।

पटना में एक सार्थक संवाद

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वरिष्ठ पत्रकार देवेंद्र मिश्र जी, संजीव कुमार, कृष्णकांत ओझा और सेन्ट्रल यूनिवसिर्टी, पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष डॉ अतीस परासर साथ में लोकेन्द्र सिंह।

स्मार्ट सिटी योजना : आधुनिक राष्ट्र निर्माण का अभिनव पहल

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डॉ. सौरभ मालवीय
किसी भी देश, समाज और राष्ट्र के विकास की प्रक्रिया के आधारभूत तत्व सामाजिक-आर्थिक दृष्टिकोण, वैचारिक स्पष्टता और सांस्कृतिक विकास ही उसका आधार स्तम्भ होता है जिससे वहां के लोग आपसी भाईचारे से विकास की नैया आगे बढ़ाते है। समाज का प्रत्येक वह व्यक्ति जो राष्ट्र का नेतृत्व करना चाहता है उसके पास राष्ट्र निर्माण के लिए एक दृष्टि होनी चाहिए साथ ही उसे क्रियात्मक रूप देने के लिए एक कारगर योजना भी होनी चाहिए। भारत का यह दुर्भाग्य रहा है कि कहने को तो देश के पास राष्ट्र-नायको की कभी कोई कमी नही रही, परंतु आजादी के समय से लेकर मई 2014 तक एक से बढ़ कर एक बुद्धि वादियों के हाथ में देश का नेतृत्व रहा लेकिन राष्ट्र निर्माण के लिए उनके द्वारा जो भी पहल की गई वह मौलिक सोच पर आधारित नही थी। देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू जहा देश को समय से पहले इंग्लैंड (विकसित राष्ट्र) बनाना चाहते थे, वही भारत के अंतिम कांग्रेसी प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की सोच कभी उनकी खुद की नही रही और वो पूरे कार्य काल तक नाम मात्र के कठपुतली प्रधानमंत्री बन कर रह गए। राष्ट्र को विकसित राष्ट्र बनान…

सांस्कृतिक एकता की प्रतीक विजयदशमी

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डॊ. सौरभ मालवीय
भारत एक विशाल देश है. इसकी भौगोलिक संरचना जितनी विशाल है, उतनी ही विशाल है इसकी संस्कृति. यह भारत की सांस्कृतिक विशेषता ही है कि कोई भी पर्व समस्त भारत में एक जैसी श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया जाता है, भले ही उसे मनाने की विधि भिन्न हो. ऐसा ही एक पावन पर्व है दशहरा, जिसे विजयदशमी के नाम से भी जाना जाता है. दशहरा भारत का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है. विश्वभर में हिन्दू इसे हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं. यह अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है. इस दिन भगवान विष्णु के अवतार राम ने रावण का वध कर असत्य पर सत्य की विजय प्राप्त की थी. रावण भगवान राम की पत्नी सीता का अपहरण करके लंका ले गया था. भगवान राम देवी दुर्गा के भक्त थे, उन्होंने युद्ध के दौरान पहले नौ दिन तक मां दुर्गा की पूजा की और दसवें दिन रावण का वध कर अपनी पत्नी को मुक्त कराया. दशहरा वर्ष की तीन अत्यंत महत्वपूर्ण तिथियों में से एक है, जिनमें चैत्र शुक्ल की एवं कार्तिक शुक्ल की प्रतिपदा भी सम्मिलित है. यह शक्ति की पूजा का पर्व है. इस दिन देवी दुर्गा की भी पूजा-अर्चना की जाती है. इस दिन लोग नया कार्य प…

परली वैद्यनाथ

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महाराष्ट्र राज्य के मराठवाडा क्षेत्र के बीड़ जिले में स्थित धार्मिक नगर परली वैजनाथ (परली वैद्यनाथ), और यहां पर स्थित है भगवान शिव का सुप्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग मंदिर, जिसमें विराजते हैं भगवान् वैद्यनाथ जो की शिवपुराण के कोटिरुद्रसंहिता के 28वें अध्याय के अंतर्गत वर्णित द्वादशज्योतिर्लिंगस्तोत्रं के अनुसार भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक हैं. हालांकि बहुत से लोग मानते हैं की यह ज्योतिर्लिंग झारखंड के देवघर में स्थित बैद्यनाथ धाम मंदिर में स्थित है, फिर भी भक्तों का एक बड़ा वर्ग मानता है की बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग परली में ही है.

पुनरुथान के लिए शोध

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रिसर्च फॉर रिसर्जेन्स फाउंडेशन, डॉ उज्ज्वला चक्रदेव का उदबोधन