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Showing posts from May, 2016

मोदी ने बहायी विकास की गंगा

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-डॉ. सौरभ मालवीय  
देश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार को दो वर्ष हो गए हैं. इन दो वर्षों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विश्वभर के अनेक देशों में यात्रा कर उनसे संबंध प्रगाढ़ बनाने का प्रयास किया है. जनकल्याण की अनेक योजनाएं शुरू की हैं. सरकार ने अनेक कल्याणकारी कार्य किए हैं कि हर जगह मोदी ही मोदी के जयकारे हैं. सरकार ने विकास का नारा दिया और विकास को ही प्राथमिकता दी. चहुंओर विकास की गंगा बह रही है. स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में प्रधानमंत्री का कहना है कि अगर देश के एक करोड़ लोग गैस की सब्स‍िडी छोड़ सकते हैं, तो देश के डॉक्टर भी 12 महीनों में 12 दिन गरीब प्रसूता माताओं को दे सकते हैं. देश में डॉक्‍टरों की कमी है, इसलिए डॉक्‍टरों की रिटायरमेंट की उम्र 60-62 की बजाय 65 साल कर दी जाएगी, ताकि डॉक्‍टरों की सेवा ली जा सकें और नये डॉक्‍टर तैयार किए जा सकें. वह कहते हैं कि यह स्वच्छता अभि‍यान गरीबों के लिए है. गरीब बीमार होते हैं, तो उनका रोजगार छिन जाता है. लोगों ने स्वच्छता अभि‍यान को अपना लिया है. प्रधानमंत्री मुद्रा योजना लेकर आए, ताकि जो लोग छोटा-मोटा काम करते हैं, वे बैंकों से पैसे …

माता नर्मदा को समर्पित है बगिया

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यहां प्राकृतिक रूप से आमनमर्दा पुष्पों,केले और अन्य बहुत से फलों के पेड़ और जड़ी-बूटियां है. इस बगिया में माता नर्मदा खेलती और भ्रमण करती थीं.

पुण्य सलिला मां नर्मदा से साक्षात्कार

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मातृत्व भारतीय संस्कृति में अतुलनीय स्थान है. मातृत्व केवल एक शरीर में नहीं बसता, अपितु एक भाव के रूप में संपूर्ण समाज में प्रभावित होता. मेकलसुता मां नर्मदा मातृत्व के भाव का एक ऐसा ही विराट प्रवाह है, जो अनंतकाल से अपनी भूमि और उस पर जन्म लेने वाली असंख्य संतानों को सभ्यता,संस्कारों, भक्ति, कला, प्रेम, स्वतंत्रता और समृद्धि के जीवन मूल्यों से पोषित करती है और अन्ततः अपनी सन्तानों के लिए मुक्ति का साधन भी बनती है.

अमरकंटक

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यहां सुकून है शान्ति है और आनन्द है
अमरकण्टक प्रवास पर हूं. यहां के खूबसूरत झरने, पवित्र नदियां, ऊंची पहाड़ियों और शांत वातावरण मंत्रमुग्ध करने वाला है, चारों ओर टीक और महुआ के गगन चुम्बी पेड़ हैं. अमरकंटक से माता नर्मदा और सोन नदी की उत्पत्ति हुई है. भगवान शिव की पुत्री नर्मदा जीवनदायिनी नदी रूप में यहां से बहती है. मुझे दर्शन का अवसर मिला है.  कुछ दिनों तक आप सभी को भी यहां के बारे में बताने का प्रयास करूंगा.

वैज्ञानिक वंदना शिवा से सुखद मुलाकात

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दार्शनिक, पर्यावरण कार्यकर्ता, पर्यावरण संबंधी नारी अधिकारवादी एवं कई पुस्तकों की लेखिका हैं. वर्तमान में दिल्ली में स्थित, शिवा अग्रणी वैज्ञानिक और तकनीकी पत्रिकाओं में 300 से अधिक लेखों की रचनाकार हैं. उन्होंने 1978 में डॉक्टरी शोध निबंध: "हिडेन वैरिएबल्स एंड लोकैलिटी इन क्वान्टम थ्योरी" के साथ पश्चिमी ओंटेरियो विश्वविद्यालय, कनाडा से अपनी पीएचडी की उपाधि प्राप्त की.
1982 में उन्होंने विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं परिस्थिति विज्ञान के लिए अनुसंधान फाउंडेशन की स्थापना की, जिसने नवदान्य की रचना की. उनकी पुस्तक "स्टेयिंग अलाइव" ने तीसरी दुनिया की महिलाओं के संबंध में धारणा को पुन: परिभाषित करने में सहायता की. शिवा ने अंतर्राष्ट्रीय वैश्वीकरण मंच, महिलाओं के पर्यावरण एवं विकास संगठन एवं तीसरी दुनिया के नेटवर्क सहित भारत एवं विदेशों में सरकारों तथा गैर-सरकारी संगठनों के सलाहकार के रूप में भी कार्य किया है.

स्मृतियों का संसार

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आज अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस है. इस अवसर पर भोपाल स्थित दुष्यन्त कुमार स्मारक पाण्डुलिपि संग्रहालय में विद्धवान साहित्यकारों की स्मृतियों के बीच.

पत्रकारिता विश्वविद्यालय का चीन के विवि के साथ एमओयू

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चीन के मीडिया और प्रिंटिंग तकनीक के प्रमुख विश्वविद्यालय बीजिंग इस्टीट्यूट ऑफ ग्राफिक कम्युनिकेशन के साथ एमओयू हुआ है. माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफ.बीके कुठियाला और बिआईजीसी की ओर से प्रेसिडेंट लुओ और विभाग की निदेशक झेंग शेरु ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए. दोनों मिलकर शोध, अकादमिक सहयोग करते हुए स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम चलाएंगे.

विचार कुंभ : परंपराओं को जीवित रखने का प्रयास

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डॊ. सौरभ मालवीय
मध्यप्रदेश के उज्जैन में चल रहे सिंहस्थ कुंभ के दौरान 12 से 14 मई तक निनौरा में तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय विचार महाकुंभ का आयोजन किया गया. इस दौरान धार्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक मुद्दों पर भी खुलकर चर्चा की गई. वक्ताओं ने कृषि, पर्यावरण, शिक्षा, संस्कृति, भाषा, चिकित्सा, स्वच्छता, महिला सशक्तिकरण आदि विषयों पर अपने विचार व्यक्त करते हुए देश और समाज के उत्थान पर बल दिया.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विचार कुंभ को संबोधित करते हुए संत-महात्माओं से आग्रह किया कि वे धरती की समस्याओं पर प्रतिवर्ष सात दिन का विचार कुंभ आयोजित करें. उन्होंने कहा कि आदिकाल से चले आ रहे कुंभ के समय और कालखंड को लेकर अलग-अलग मत है, लेकिन इतना निश्चित है कि यह मानव की सांस्कृतिक यात्रा की पुरातन व्यवस्था में से एक है. इस विशाल भारत को अपने में समेटने का प्रयास कुंभ मेले के माध्यम से ही होता है. उन्होंने कहा कि समाज की चिंता करने वाले ऋषि-मुनि 12 वर्ष में एक बार प्रयाग में कुंभ में एकत्रित होते थे, जिसमें वे विचार विमर्श करते हुए विगत वर्ष की सामाजिक स्थिति का अध्ययन करते थे, उसका विश्लेषण करते …

काव्य संग्रह ’बिखरने से बचाया जाए’ का लोकार्पण

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दिल्ली के कन्सटीट्यूशन क्लब (डिप्टी चेयरमैन हॉल) में आज शाम लेखिका श्रीमती अलका सिंह के काव्य संग्रह ’बिखरने से बचाया जाए’ का लोकार्पण प्रख्यात साहित्यकार एवं आलोचक डॊ. नामवर सिंह ने किया. इस मौक़े पर उन्होंने कहा कि हिंदी में ग़ज़ल लिखना मुश्किल काम है. बहुत कम लोग ही लिखते हैं, लेकिन अलका सिंह की किताब एक उम्मीद जगाती है कि कविता, ग़ज़लें और मुक्तक को आने वाली पीढ़ी ज़िंदा रखेंगी. यह अनूठा काव्य संग्रह है. उन्होंने कहा कि लोकार्पण कार्यक्रम में इतने लोगों का जुटना अपने आप में मायने रखता है. राजनीति करने वालों ने दिल्ली को उजाड़ दिया है, यह केवल राजधानी बन कर न रहे, बिखरने से बचे. इसके लिए कविताएं ज़रूरी हैं. ’ज़रूरी तो नहीं खुशियां ही मिलें दामन में, कुछ ग़मो को भी तो सीने से लगाया जा’ बेहतरीन शेअर है.

समीक्षक अनंत विजय ने कहा कि यह संग्रह कॉकटेल है, जिसमे ग़ज़लें, कविताएं और मुक्तक हैं. हिंदी साहित्य में प्रेम का भाव है, लेकिन इस संग्रह ने नई उम्मीद जगाई है. रिश्तों को लेकर लेखिका की बेचैनी साफ़ झलकती है.
’दाग़ अच्छे है’ में अंग्रेज़ी के शब्दो का प्रयोग धूप में मोती की तरह है. आधुनिक युग की त्रास…

साहित्य और समाज

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डॊ. सौरभ मालवीय
साहित्य समाज का दर्पण है, समाज का प्रतिबिम्ब है, समाज का मार्गदर्शक है तथा समाज का लेखा-जोखा है. किसी भी राष्ट्र या सभ्यता की जानकारी उसके साहित्य से प्राप्त होती है. साहित्य लोकजीवन का अभिन्न अंग है.  किसी भी काल के साहित्य से उस समय की परिस्थितियों, जनमानस के रहन-सहन, खान-पान व अन्य गतिविधियों का पता चलता है. समाज साहित्य को प्रभावित करता है और साहित्य समाज पर प्रभाव डालता है. दोनों एक सिक्के के दो पहलू हैं. साहित्य का समाज से वही संबंध है, जो संबंध आत्मा का शरीर से होता है. साहित्य समाज रूपी शरीर की आत्मा है. साहित्य अजर-अमर है. महान विद्वान योननागोची के अनुसार समाज नष्ट हो सकता है, राष्ट्र भी नष्ट हो सकता है, किन्तु साहित्य का नाश कभी नहीं हो सकता.

साहित्य संस्कृत के ’सहित’ शब्द से बना है. संस्कृत के विद्वानों के अनुसार साहित्य का अर्थ है- "हितेन सह सहित तस्य भवः” अर्थात कल्याणकारी भाव.  कहा जा सकता है कि साहित्य लोककल्याण के लिए ही सृजित किया जाता है. साहित्य का उद्देश्य मनोरंजन करना मात्र नहीं है, अपितु इसका उद्देश्य समाज का मार्गदर्शन करना भी है. राष्ट्रकवि…

'बिखरने से बचाया जाए' काव्य संग्रह का लोकार्पण कल

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नई दिल्ली. आगामी 7 मई दिन (शनिवार) को कन्सटीट्यूशन क्लब (डिप्टी चेयरमैन हॉल) में शाम चार बजे लेखिका श्रीमती अलका सिंह के काव्य संग्रह ’बिखरने से बचाया जाए’ का लोकार्पण प्रख्यात साहित्यकार एवं आलोचक डॊ. .नामवर सिंह द्वारा किया जाएगा. इस साहित्य समागम का आयोजन नया मीडिया मंच और प्रवक्ता.कॉम के संयुक्त तत्वाधान में किया जा रहा है. कार्यक्रम की अध्यक्षता डॊ. नामवर सिंह करेंगे तथा बतौर वक्ता साहित्यकार एवं सुप्रसिद्ध कवयित्री डॊ.अनामिका, श्री अमरनाथ अमर, कार्यक्रम निर्देशक दुरदर्शन, नई दिल्ली तथा वरिष्ठ पत्रकार एवं समीक्षक अनंत विजय होंगे. मंच संचालन माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में सहायक प्राध्यापक डॊ. सौरभ मालवीय करेंगे. लेखिका अलका सिंह ने बताया कि कार्यक्रम में और भी कई लेखक, कवि और पत्रकार अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे.

सद गुरु का सानिध्य

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मैं कभी मेधावी छात्र नहीं रहा जबकि बारहवी तक विज्ञान संकाय का विद्यार्थी था फिर स्नातक हिन्दी साहित्य में, स्नातकोत्तर प्रसारण पत्रकारिता में और PhD भी मीडिया में ही पूर्ण की. उन दिनों उदंडता, कुतर्क और विवाद यह मेरे स्वभाव का अंग था. प्रायः किसी न किसी से बहसबाजी हो ही जाती और उसका अंत विवाद के साथ होता. इस कारण मेरी छवि ठीक नहीं बन रही थी. इसी बीच मुझे संघ कार्यालय पर रहने का अवसर मिला. यहां यह बताना चाहूँगा कि संघ कार्यालय अर्थात संघ के पूर्णकालिक प्रचारक का निवास (प्रचारक वह होता है, जो अपना पूरा जीवन संघ कार्य के लिए देता है) कार्यालय की दिनचर्या सुनिश्चित है. प्रातः जागरण मंत्र से प्रारम्भ होकर जलपान, भोजन, संध्या और रात्रि भोजन, विश्राम तक सब कुछ समयबद्ध रहता. अनुशासन और आध्यात्मिक वातावरण के कारण लगता की कार्यालय एक मन्दिर है.
कार्यालय पर रहते हुए मेरे श्रद्धा के केन्द्र में अनेक ऋषितुल्य प्रचारक हैं, जिनका जिक्र अभी और करूँगा. इसी क्रम में उस समय देवरिया के जिला प्रचारक श्री बालमुकुन्द जी से परिचय हुआ. बालमुकुंद जी इतिहास में स्नातकोत्तर, बीएड और PhD हैं. स्वभावतया मिलनसार, …

साहित्य और समाज

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डॊ. सौरभ मालवीय
साहित्य समाज का दर्पण है, समाज का प्रतिबिम्ब है, समाज का मार्गदर्शक है तथा समाज का लेखा-जोखा है. किसी भी राष्ट्र या सभ्यता की जानकारी उसके साहित्य से प्राप्त होती है. साहित्य लोकजीवन का अभिन्न अंग है.  किसी भी काल के साहित्य से उस समय की परिस्थितियों, जनमानस के रहन-सहन, खान-पान व अन्य गतिविधियों का पता चलता है. समाज साहित्य को प्रभावित करता है और साहित्य समाज पर प्रभाव डालता है. दोनों एक सिक्के के दो पहलू हैं. साहित्य का समाज से वही संबंध है, जो संबंध आत्मा का शरीर से होता है. साहित्य समाज रूपी शरीर की आत्मा है. साहित्य अजर-अमर है. महान विद्वान योननागोची के अनुसार समाज नष्ट हो सकता है, राष्ट्र भी नष्ट हो सकता है, किन्तु साहित्य का नाश कभी नहीं हो सकता.

साहित्य संस्कृत के ’सहित’ शब्द से बना है. संस्कृत के विद्वानों के अनुसार साहित्य का अर्थ है- "हितेन सह सहित तस्य भवः” अर्थात कल्याणकारी भाव.  कहा जा सकता है कि साहित्य लोककल्याण के लिए ही सृजित किया जाता है. साहित्य का उद्देश्य मनोरंजन करना मात्र नहीं है, अपितु इसका उद्देश्य समाज का मार्गदर्शन करना भी है. राष्ट्रकवि…

ज़िंदगी की असली उड़ान अभी बाक़ी है

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ज़िंदगी की असली उड़ान अभी बाक़ी है
ज़िंदगी के कई इम्तेहान अभी बाक़ी हैं
स्नातक प्रथम वर्ष (इलेक्ट्रानिक मीडिया) के ये छात्र मेरे पास आए और बोले कि एक वेबसाइट और डॉक्यूमेंट्री के लिए हम आप से चर्चा करेंगे. भविष्य के इन युवा पत्रकारों को हार्दिक शुभकामनाएं.

जो भी करों शिद्दत से करो

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इस नदी की धार में ठंडी हवा आती तो है
नाव जर्जर ही सही, लहरों से टकराती तो है