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Showing posts from January, 2016

श्रद्धा भाव है श्राद्ध

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डॉ. सौरभ मालवीय
पितर हमारे किसी भी कार्य में अदृश्य रूप से सहायक की भूमिका अदा करते हैं, क्योंकि अंतत: हम उन्हीं के तो वंशज हैं. ज्योतिष विज्ञान की मान्यता के अनुसार वे हमारे सभी गतिविधियों पर अपनी अतिन्द्रीय सामर्थ के अनुसार निगाह रखे रहते हैं. यदि हम अपना भाव भावात्मक लगाव उनसे जोड़ सके तो वे हमारी अनेक सहायता करते हैं जो हरदम कल्पनातीत होती है. विज्ञान भी इन बातों को स्वीकार करता है कि मनुष्य जो कुछ भी कार्य कर रहा है वह केवल मनुष्य की सामर्थ में ही नहीं है, अपितु कुछ ऐसे भी कार्य हैं जो होने लायक नहीं है और हो जाते हैं. पिछली शताब्दी में विज्ञान के सर्वाधिक महत्वपूर्ण वेन्जीन की अंतर-संरचना की खोज सपने में हुई थी. केकुले नाम के एक प्रख्यात वैज्ञानिक के तीन वर्ष का परिश्रम काम नहीं आ रहा था और एक दिन सपने में उसने एक सापीन को उसकी पूछ अपने मुंह में डाले हुए देखा और उसे सपने में किसी ने कहा बेटे मैं तुम्हारे परिश्रम से अत्यंत प्रसन्न हूं. यही तो वेन्जीन की संरचना है और उसके बाद केकुले की नींद खुल गई. अब वह अत्यंत हल्कापन और आनंद अनुभव कर रहे थे. उन्हें लगा की सपने में बोलने वाला वह …

हम सब वंदन करते है

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जिस विवेक की शुभ वाणी ने, धरती को आनंद दिया
हिन्दू धर्म हुंकार उठा, पाखंडवाद को बंद किया
युवा संत के जनम पर्व पर, हम सब वंदन करते है
भारत माता दिग्विजयी हो यह अभिनन्दन करते है
-डॊ. सौरभ मालवीय