Posts

Showing posts from May, 2015

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की आधारशिला पर खड़ा होता भारत

Image
डॉ. सौरभ मालवीय                             
         "राष्ट्र सर्वोपरि" यह कहते नहीं बल्कि उसे जीते है प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी। पिछले कुछ दशकों में भारतीय जनमानस का मनोबल जिस प्रकार से टूटा था और अब मानों उसमें उड़ान का एक नया पंख लग गया है और अपने देश ही नहीं दुनिया भर में भारत का सीना चौड़ा करके शक्ति संपन्न राष्ट्रों एवं पड़ोसी देशों से कन्धे से कन्धा मिलाकर कदमताल करने लगा है भारत।
  किसी भी देश,समाज और राष्ट्र के विकास की प्रक्रिया के आधारभूत तत्व मानवता, राष्ट्र,समुदाय,परिवार और व्यक्ति ही केंद्र में होता है। जिससे वहां के लोग आपसी भाईचारे से अपनी विकास की नैया को आगे बढ़ाते हैं। अपने एक साल के कार्यकाल में मोदी इसी मूल तत्व के साथ आगे बढ़ रहे हैं।  एक वर्ष पहले जब नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने पूर्ण बहुमत से केंद्र में सरकार बनाई तब इनके सामने तमाम चुनौतियां खड़ी थीं और जन अपेक्षाएं मोदी के सामने सर -माथे पे।  ऐसे में प्रधानमंत्री और उनके मंत्रिपरिषद के सहयोगियों के लिए चुनौतियों का सामना करते हुए विकास के पहिये को आगे बढ़ाना आसान राह नही थी।  परन्तु मात्र 365 दि…

एक तमन्ना...

Image

सर्वे भवंतु सुखिनः को साकार करेगा एकात्म मानवदर्शन

Image
डॉ. सौरभ मालवीय
परमपावन भारत भूमि अजन्मा है यह देव निर्मित है और देवताओं के द्वारा इस धरा पर  विभिन्न अवसरों पर अलग अलग प्रकार की शक्तियां अवतरित होती रहती हैं।  जो देव निर्मित भू -भाग को अपनी ऊर्जा से  समाज का मार्गदर्शन करते हैं।  ऐसे महापुरूषों की अनंत श्रृंखला भारत में विराजमान है।
 श्रीकृष्ण की भूमि मथुरा के गाँव नगला चन्द्रभान के निवासी पंडित हरिराम उपाध्याय एक ख्यातिनाम ज्योतिषी थे।  उनके कुल में आचार और विचार संपन्न लोगों की एक आदरणीय परम्परा थी।  पंडित हरिराम उपाध्याय की समाज में इतनी प्रतिष्ठा थी की उनकी मृत्यु पर पूरे तहसील में समाज के लोगों ने अपना व्यापर और कार्य बंद करके श्रद्धांजलि अर्पित की थी। काल के कराल का उच्छेद करके विपरीत परिस्थितियों में ही तो परमात्मा जनमते हैं। इसी परम्परा में आश्विन महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को जब पूरा जगत भगवान शिव की स्तुति में लीन था तो 25 सितम्बर 1916 श्री दीनदयाल जी का जन्म हुआ। पंडित हरिराम के घर में संयुक्त परम्परा थी।  अतएव बालपन से ही दीनदयाल जी के चित्त में सामूहिक जीवन शैली का विकास हुआ।  काल चक्र घूमता रहा और दीनदयाल जी की …

प्रवक्ता सम्मान 2014

Image
प्रवक्ता डॊट कॊम द्वारा डॉ. सौरभ मालवीय को सम्मानित किया गया

मानवतावादी रचनाकार विष्णु प्रभाकर

Image
डॉ. सौरभ मालवीय
कालजयी जीवनी आवारा मसीहा के रचियता सुप्रसिद्ध साहित्यकार विष्णु प्रभाकर कहते थे कि एक साहित्यकार को केवल यह नहीं सोचना चाहिए कि उसे क्या लिखना है, बल्कि इस पर भी गंभीरता से विचार करना चाहिए कि क्या नहीं लिखना है.  वह अपने लिखने के बारे में कहते थे कि प्रत्येक मनुष्य दूसरे के प्रति उत्तरदायी है, यही सबसे बड़ा बंधन है और यह प्रेम का बंधन है. उन्होंने लेखन को नए आयाम प्रदान किए.  उनके लेखन में विविधता है, जीवन का मर्म है, मानवीय संवेदनाएं हैं. अपनी साहित्यिक शक्तियों के बारे में उनका कहना था, मेरे साहित्य की प्रेरक शक्ति मनुष्य है. अपनी समस्त महानता और हीनता के साथ, अनेक कारणों से मेरा जीवन मनुष्य के विविध रूपों से एकाकार होता रहा है और उसका प्रभाव मेरे चिंतन पर पड़ता है. कालांतर में वही भावना मेरे साहित्य की शक्ति बनी. त्रासदी में से ही मेरे साहित्य का जन्म हुआ. वह मानतावादी थे. वह राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के दर्शन और सिद्धांतों से प्रभावित थे. वह कहते थे, सहअस्तित्व में मेरा पूर्ण विश्वास है. यही सहअस्तित्व मानवता का आधार है. इसीलिए गांधी जी की अहिंसा में मेरी पूरी आस्थ…