Posts

Showing posts from 2015

अटलजी, जिन्होंने कभी हार नहीं मानी

Image
भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिवस पर विशेष

डॉ. सौरभ मालवीय
टूटे हुए तारों से फूटे वासंती स्वर
पत्थर की छाती में उग आया नव अंकुर
झरे सब पीले पात
कोयल की कुहुक रात
प्राची में अरुणिमा की रेख देख पाता हूं
गीत नया गाता हूं
टूटे हुए सपने की सुने कौन सिसकी
अंतर को चीर व्यथा पलकों पर ठिठकी
हार नहीं मानूंगा
रार नहीं ठानूंगा
काल के कपाल पर लिखता-मिटाता हूं
गीत नया गाता हूं...
यह कविता है देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की, जिन्हें सम्मान एवं स्नेह से लोग अटलजी कहकर संबोधित करते हैं. कवि हृदय राजनेता अटल बिहारी वाजपेयी ओजस्वी रचनाकार हैं. अटलजी का जन्म 25 दिसंबर, 1924 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर के शिंके का बाड़ा मुहल्ले में हुआ था. उनके पिता पंडित कृष्ण बिहारी वाजपेयी अध्यापन का कार्य करते थे और माता कृष्णा देवी घरेलू महिला थीं. अटलजी अपने माता-पिता की सातवीं संतान थे. उनसे बड़े तीन भाई और तीन बहनें थीं. अटलजी के बड़े भाइयों को अवध बिहारी वाजपेयी, सदा बिहारी वाजपेयी तथा प्रेम बिहारी वाजपेयी के नाम से जाना जाता है. अटलजी बचपन से ही अंतर्मुखी और प्रतिभा संपन्न थे. उनकी प्रारंभिक…

सेमिनार

Image
वर्धा (महाराष्ट्र) में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और सोशल मीडिया पर आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार को बतौर वक्ता संबोधित करते हुए

समविमर्श

Image
संघ विचारक माधो गोविन्द वैद्य जी से विमर्श

जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनाएं

Image
राष्ट्रऋषि श्रद्धेय श्री लालकृष्ण आडवाणी जी को जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनाएं

मानवता के कल्याण का विचार है एकात्म मानवदर्शन

Image
दीनदयाल उपाध्याय जन्मशती वर्ष पर विशेष, जयंती 25 सितंबर 
डॉ. सौरभ मालवीय
मनुष्य विचारों का पुंज होता है और सर्व प्रथम मनुष्य के चित्त में विचार ही  उभरता है। वही विचार घनीभूत होकर संस्कार बनते है और मनुष्य के कर्म रूप में परिणीति हो कर व्यष्टि और समष्टि सबके हित का कारक बनते है।  यदि विचारों की परिपक्वता अपूर्ण रह गई तो परिणाम विपरीत होने लगतेहै।  भारतीय महर्षियों ने विचारों की अनन्त उचाई छूने का प्रयास किया और इस विचार यात्रा में पाया गया कि सबसे उत्तम धर्म वही होगा जिसमें मनुष्यों के खिलने की समग्र संभावनाओं के द्वार खुले हो जिसे जो होना है वह हो और दूसरे के होने में बाधक न हो वल्कि साधक हो।  इस प्रकार के सः अस्तित्व की विचार सारणी इस धरा-धाम पर सबकी संभावनाओं के द्वार खोलती है। और इस प्रक्रिया में टकराहट की कल्पना भी नही सः अस्तित्व सहज धर्म बन जाता है और सूत्रवद्धता सबके मूल में स्थापित हो जाती है।
ऋषियों की यह चिंतन शैली भारत के जन मन में घुल हुआ है,भारत की मानसिकता इसी प्रकार के समग्र सोच पर विकसित है।  परोपकार ,अहिंसा ,करुणा ,क्षमा,दया ,आर्जव ,मृदुता,प्रतिभा इत्यादि अनेको प्रकार…

मीडिया सितारों संग

Image
मीडिया के सितारों के साथ

भारतीयता की प्रतिनिधि भाषा हिन्दी

Image
डाॅ. सौरभ मालवीय
भारतीय समाज में अंग्रेजी भाषा और हिन्दी भाषा को लेकर कुछ तथाकथित बुद्धिजीवियों द्वारा भम्र की स्थिति उत्पन्न की जा रही है। सच तो यह है कि हिन्दी भारत की आत्मा, श्रद्धा, आस्था, निष्ठा, संस्कृति और सभ्यता से जुड़ी हुई है।हिन्दी के अब तक राष्ट्रभाषा नहीं बन पाने के कारणों के बारे में समान्यतः आम भारतीय की सहज समझ यही होगी कि दक्षिण भारतीय नेताओं के विरोध के चलते ही हिन्दी देश की प्रतिनिधि भाषा होने के बावजूद राष्ट्रभाषा के रूप में अपना वाजिब हक नहीं प्राप्त कर सकी,जबकि हकीकत ठीक इसके विपरीत है । मोहनदास करमचंद गांधी यानि महात्मा गांधी सरीखा ठेठ पश्चिमी भारतीय और राजगोपालाचारी जैसा दक्षिण भारतीय नेता का अभिमत था की हिन्दी में ही देश की राष्ट्रभाषा होने के सभी गुण मौजूद है । वर्धा के राष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन की अध्यक्षा करते हुये राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने साफ शब्दों मे कहा था कि देश कि बहुसंख्यक आबादी न सिर्फ लिखती-पढ़ती है बल्कि भाषाई समझ रखती है, इसलिए हिन्दी को ही देश की राष्ट्रभाषा होनी चाहिए । उनका मानना था कि आजादी के बाद अगर हिन्दी को राष्ट्र भाषा बनाया जाता है तो…

रक्षाबंधनः भारतीय संस्कृति का प्रतिनिधि पर्व

Image
डॉ. सौरभ मालवीय
रक्षाबंधन भारतीय संस्कृति का प्रतिनिधि पर्व है ।अनेकानेक श्रेष्ठतम आदर्शों उच्चतम प्रेरणाओ,महान प्रतिमानों और वैदिक वांग्मय से लेकर अद्यतन संस्कृति तक फैले हुए भारतीयता के समग्र जीवन का प्राण है|यह पर्व श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को आयोजित किया जाता जाता है, जब चन्द्रमा श्रवण नक्षत्र में विचरण करते हों तो यह पर्व आता है। इस श्रवण नक्षत्र का नाम ही मातृ–पितृ भक्ति के श्रेष्टतम बिन्दु श्रवण कुमार के नाम पर पड़ा है|यह नाम ही बताता है कि हमारे आदर्श कैसे होने चाहिए। इस नाम की गरिमा इतनी आदरणीय है कि अनेक कुलीन परिवारों में श्रावणी कर्म किया जाता है।
     इसी दिन भारत की सांस्कृतिक नगरी काशी में भगवान विष्णु का हयग्रीव अवतार हुआ था,आज के ही शुभ दिन पर हमारे ऋषियों ने परम-पावन सिन्धु नदी में प्रातःकाल स्नान करके सामवेद को देखा था, इसी सामवेद में परम प्रतापी राजराजेश्वर नरेश्वर श्री लंकेश्वर महाराजा रावण ने स्वर दिया था श्री रावण उत्तम कुल उत्पन्न ऋषि पुलत्स के वंशज थे। सामवेद की स्वर परम्परा आज भी महाराजा लंकेश्वर का अनुसरण करती है|आज ही के दिन भगवान महादेव ने श्री अमरनाथ में परमस…

संचारक के गुण व्याख्यान

Image
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय भोपाल में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार
में संचारक के गुण विषय पर मेरा व्याख्यान

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की आधारशिला पर खड़ा होता भारत

Image
डॉ. सौरभ मालवीय                             
         "राष्ट्र सर्वोपरि" यह कहते नहीं बल्कि उसे जीते है प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी। पिछले कुछ दशकों में भारतीय जनमानस का मनोबल जिस प्रकार से टूटा था और अब मानों उसमें उड़ान का एक नया पंख लग गया है और अपने देश ही नहीं दुनिया भर में भारत का सीना चौड़ा करके शक्ति संपन्न राष्ट्रों एवं पड़ोसी देशों से कन्धे से कन्धा मिलाकर कदमताल करने लगा है भारत।
  किसी भी देश,समाज और राष्ट्र के विकास की प्रक्रिया के आधारभूत तत्व मानवता, राष्ट्र,समुदाय,परिवार और व्यक्ति ही केंद्र में होता है। जिससे वहां के लोग आपसी भाईचारे से अपनी विकास की नैया को आगे बढ़ाते हैं। अपने एक साल के कार्यकाल में मोदी इसी मूल तत्व के साथ आगे बढ़ रहे हैं।  एक वर्ष पहले जब नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने पूर्ण बहुमत से केंद्र में सरकार बनाई तब इनके सामने तमाम चुनौतियां खड़ी थीं और जन अपेक्षाएं मोदी के सामने सर -माथे पे।  ऐसे में प्रधानमंत्री और उनके मंत्रिपरिषद के सहयोगियों के लिए चुनौतियों का सामना करते हुए विकास के पहिये को आगे बढ़ाना आसान राह नही थी।  परन्तु मात्र 365 दि…

एक तमन्ना...

Image

सर्वे भवंतु सुखिनः को साकार करेगा एकात्म मानवदर्शन

Image
डॉ. सौरभ मालवीय
परमपावन भारत भूमि अजन्मा है यह देव निर्मित है और देवताओं के द्वारा इस धरा पर  विभिन्न अवसरों पर अलग अलग प्रकार की शक्तियां अवतरित होती रहती हैं।  जो देव निर्मित भू -भाग को अपनी ऊर्जा से  समाज का मार्गदर्शन करते हैं।  ऐसे महापुरूषों की अनंत श्रृंखला भारत में विराजमान है।
 श्रीकृष्ण की भूमि मथुरा के गाँव नगला चन्द्रभान के निवासी पंडित हरिराम उपाध्याय एक ख्यातिनाम ज्योतिषी थे।  उनके कुल में आचार और विचार संपन्न लोगों की एक आदरणीय परम्परा थी।  पंडित हरिराम उपाध्याय की समाज में इतनी प्रतिष्ठा थी की उनकी मृत्यु पर पूरे तहसील में समाज के लोगों ने अपना व्यापर और कार्य बंद करके श्रद्धांजलि अर्पित की थी। काल के कराल का उच्छेद करके विपरीत परिस्थितियों में ही तो परमात्मा जनमते हैं। इसी परम्परा में आश्विन महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को जब पूरा जगत भगवान शिव की स्तुति में लीन था तो 25 सितम्बर 1916 श्री दीनदयाल जी का जन्म हुआ। पंडित हरिराम के घर में संयुक्त परम्परा थी।  अतएव बालपन से ही दीनदयाल जी के चित्त में सामूहिक जीवन शैली का विकास हुआ।  काल चक्र घूमता रहा और दीनदयाल जी की …

प्रवक्ता सम्मान 2014

Image
प्रवक्ता डॊट कॊम द्वारा डॉ. सौरभ मालवीय को सम्मानित किया गया

मानवतावादी रचनाकार विष्णु प्रभाकर

Image
डॉ. सौरभ मालवीय
कालजयी जीवनी आवारा मसीहा के रचियता सुप्रसिद्ध साहित्यकार विष्णु प्रभाकर कहते थे कि एक साहित्यकार को केवल यह नहीं सोचना चाहिए कि उसे क्या लिखना है, बल्कि इस पर भी गंभीरता से विचार करना चाहिए कि क्या नहीं लिखना है.  वह अपने लिखने के बारे में कहते थे कि प्रत्येक मनुष्य दूसरे के प्रति उत्तरदायी है, यही सबसे बड़ा बंधन है और यह प्रेम का बंधन है. उन्होंने लेखन को नए आयाम प्रदान किए.  उनके लेखन में विविधता है, जीवन का मर्म है, मानवीय संवेदनाएं हैं. अपनी साहित्यिक शक्तियों के बारे में उनका कहना था, मेरे साहित्य की प्रेरक शक्ति मनुष्य है. अपनी समस्त महानता और हीनता के साथ, अनेक कारणों से मेरा जीवन मनुष्य के विविध रूपों से एकाकार होता रहा है और उसका प्रभाव मेरे चिंतन पर पड़ता है. कालांतर में वही भावना मेरे साहित्य की शक्ति बनी. त्रासदी में से ही मेरे साहित्य का जन्म हुआ. वह मानतावादी थे. वह राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के दर्शन और सिद्धांतों से प्रभावित थे. वह कहते थे, सहअस्तित्व में मेरा पूर्ण विश्वास है. यही सहअस्तित्व मानवता का आधार है. इसीलिए गांधी जी की अहिंसा में मेरी पूरी आस्थ…

चला था सफ़र में...

Image
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी और राजनाथ सिंह जी के साथ

सानिध्य का सुख

Image
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघ चालक आदरणीय मोहन जी भागवत का सानिध्य

मीडिया चौपाल

Image
10 और 11 अक्टूबर 2015 को ग्वालियर शहर में आयोजित मीडिया चौपाल में मंचासीन

मुलाक़ात

Image
भोपाल में आयोजित विश्व हिन्दी सम्मेलन में वरिष्ठ साहित्यकार नरेंद्र कोहली जी के साथ

डॉ. सौरभ मालवीय

Image
गिरकर उठना, उठकर चलना... यह क्रम है संसार का... कर्मवीर को फ़र्क़ न पड़ता किसी जीत और हार का... क्योंकि संघर्षों में पला-बढ़ा... संघर्ष ही मेरा जीवन... 
-डॉ. सौरभ मालवीय
उत्तरप्रदेश के देवरिया जनपद के पटनेजी गाँव में जन्मे डाॅ.सौरभ मालवीय बचपन से ही सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्र-निर्माण की तीव्र आकांक्षा के चलते सामाजिक संगठनों से जुड़े हुए है. जगतगुरु शंकराचार्य एवं डाॅ. हेडगेवार की सांस्कृतिक चेतना और आचार्य चाणक्य की राजनीतिक दृष्टि से प्रभावित डाॅ. मालवीय का सुस्पष्ट वैचारिक धरातल है. ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और मीडिया’ विषय पर आपने शोध किया है. आप का देश भर की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं एवं अंतर्जाल पर समसामयिक मुद्दों पर निरंतर लेखन जारी है. उत्कृष्ट कार्याें के लिए उन्हें अनेक पुरस्कारों से सम्मानित भी किया जा चुका है, जिनमें मोतीबीए नया मीडिया सम्मान, विष्णु प्रभाकर पत्रकारिता सम्मान और प्रवक्ता डाॅट काॅम सम्मान आदि सम्मिलित हैं. संप्रति- माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, नोयडा में सहायक प्राध्यापक, जनसंचार विभाग के पद पर कार्यरत हैं.
मोबाइल : 09907890614  ई-मे…