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ताजमहल भगवान शंकर का प्राचीन मंदिर था

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डॉ. सौरभ मालवीय
अनेक विचारकों ने गहन शोध के उपरान्त इस स्थापत्य को बारहवी शताब्दी के पूर्वार्ध में निर्मित भगवान शंकर का मंदिर मानते है । जिसे बुंदेलखंड के महाराजा पर्माद्रि देव ने बनवाया था। पंद्रहवी शताब्दी में जयपुर के राजा ने राजा पर्माद्रि देव के वंशजो को पराजित कर आगरा को अधिन कर लिया। और यह  विश्वविख्यात “तेजो महालय मन्दिर ‘’ के साथ साथ जयपुर के राजा का अस्थायी आवास भी हो गया, जिसे शाहजहा ने नाम मात्र का मुआवजा देकर कब्जा कर लिया और थोड़ी बहुत तरमीन के साथ उसे मजार बनवा दिया। आज भी मूलरूप से वह स्थापत्य अपनी हिन्दू गरिमा को गा रहा है । विश्व के किसी भी मुस्लिम ढ़ाचे मे मीनार भूमि पर नहीं बनायी जाती है। वह दीवारों के ऊपर ही बनायी जाती है जबकि ताजमहल के चारों कोनों पर बने मीनार मन्दिर के दीप स्तम्भ है । इस्लामी रचनावों मे किसी भी प्रकार की प्रकृतिक वस्तुवों का चित्रण वर्जित है वे वेल –बूटे तथा अल्पना मानते है । जबकि ताजमहल कमल पुष्पों ,कलश, नारियल आदि शुभ प्रतीकों से अलंकृत है । ताजमहल की अष्ठफलकीय संरचना उसके हिन्दू स्थापत्य को सिद्ध कर रही है । दुनिया भर के मजारों मे मुर्दे का …