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मां नर्मदा सामाजिक कुंभ

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डॉ. सौरभ मालवीय
गंगा, यमुना, सरस्वती, नर्मदा क्षिप्रा, गोदावरी, कावेरी जैसी पवित्र नदियों के किनारे ही संपूर्ण विश्व को अपने ज्ञान से आलोकित करने वाली सनातन संस्कृति ने जन्म लिया. इन नदियों के तटों पर ही आयोजित होने वाले कुंभों में देश के कोने-कोने से संत व प्रबुद्धजन एकत्र होकर काल, परिस्थिति का समग्र विश्लेषण करने के साथ समाज का मार्गदर्शन करते हैं.

आज देश के सामने अनेक संकट खड़े हो गए हैं. आतंकवाद, अलगाववाद चरम सीमा पर है. विधर्मी मतान्तरण का कुचक्र चला रहे हैं. समाज को अपनी आस्थाओं के प्रति दृढ़ बनाना आज की आवश्यकता है. समाज में समरसता निर्माण हो तभी संपूर्ण राष्ट्र की एकता संभव है. इन सभी विषयों को ध्यान में रखकर मां नर्मदा के पावन तट पर मां नर्मदा सामाजिक कुंभ 10 से प्रारंभ होकर 12 फरवरी 2011 माघ शुल्क सप्तमी, अष्टमी एवं नवमीं को संपन्न हुआ

इस कुंभ में मध्यभारत, महाकोशल, मालवा, छत्तीसगढ़, झारखंड, उड़ीसा, काशी, गुजरात, विदर्भ, आंध्रप्रदेश, बिहार, राजस्थान, दिल्ली, उत्तरप्रदेश आदि प्रांतों से लाखों लोग आए. कुंभ के लिए जनजागरण करने हेतु दिसंबर मास से गांव-गांव में नर्मदा गाथा सुनान…